उत्तर प्रदेशबस्ती

ग्राम पंचायत हसनी की मतदाता सूची से 118 मतदाताओं के नाम विलोप का मामला गंभीर सवालों के घेरे में

इस प्रकरण में अब पुलिस विवेचना के साथ-साथ आरटीआई (सूचना का अधिकार) से मिलने वाले दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। इन्हीं अभिलेखों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मतदाता सूची से 118 नाम हटाने की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और प्रशासनिक स्तर पर किस-किस अधिकारी की क्या भूमिका रही है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

‘क्यों’ नहीं ‘एसडीएम’ पर ‘केस’? क्यों कार्रवाई का ठीकरा सफाई ‘कर्मी’ पर?

  • आईजीआरएस शिकायत के बाद जांच में खुलासे: बिना व्यक्तिगत दोष तय किए सफाईकर्मी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
  • निर्वाचन जैसे संवेदनशील कार्य में सफाईकर्मी की तैनाती और कंप्यूटर फीडिंग पर उठे प्रशासनिक जवाबदेही के बड़े प्रश्न

​ग्राम पंचायत हसनी की मतदाता सूची से 118 मतदाताओं के नाम गलत तरीके से विलोप होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह उठ रहा है कि जो मुकदमा एसडीएम, कानूनगो और एडीओ पंचायत पर होना चाहिए था, उसे प्रशासनिक तंत्र ने अपने बचाव में एक सफाई कर्मी पर क्यों दर्ज कर दिया?

जांच रिपोर्ट और एफआईआर पर गंभीर सवाल

​आईजीआरएस शिकायत के बाद नायब तहसीलदार और एडीओ पंचायत की संयुक्त जांच में यह साफ हुआ कि 118 मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए थे। हालांकि, उपलब्ध जांच रिपोर्ट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं मिलता है कि इस कृत्य के लिए सफाईकर्मी फिरोज अहमद व्यक्तिगत रूप से दोषी पाए गए थे।

  • ग्राम पंचायत हसनी की मतदाता सूची से 118 मतदाताओं के नाम गलत तरीके से विलोप होने के मामले में मुकदमा आखिर एसडीएम, कानूनगो और एडीओ पंचायत पर होने के बजाय अपने बचाव में सफाई कर्मी पर क्यों दर्ज कर दिया गया?
  • जांच रिपोर्ट की विसंगतियां: आईजीआरएस शिकायत के बाद नायब तहसीलदार और एडीओ पंचायत की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 118 नाम गलत तरीके से हटाए गए, लेकिन उपलब्ध जांच रिपोर्ट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि इसके लिए सफाईकर्मी फिरोज अहमद व्यक्तिगत रूप से दोषी पाए गए थे।
  • फीडिंग और तकनीकी प्रक्रिया: जांच रिपोर्ट के अनुसार, बीएलओ द्वारा 589 मतदाताओं का आधार सत्यापन कराया गया था और कंप्यूटर पर फीडिंग के दौरान 123 नाम डुप्लीकेट मानकर विलोप कर दिए गए, जिनमें से 5 नाम दोहराए गए थे, और वास्तविक रूप से 118 नाम गलत तरीके से हटे, जिसके बाद फिरोज अहमद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर दी गई।
  • प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े प्रश्न:
    • ​यदि फिरोज अहमद एक सफाईकर्मी हैं, तो उन्हें निर्वाचन जैसे संवेदनशील कार्य में किस आदेश के तहत लगाया गया था और क्या उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य करने के लिए किसी सक्षम अधिकारी ने अधिकृत किया था?
    • ​यदि जांच रिपोर्ट ने किसी व्यक्ति की स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं की थी, तो एफआईआर का आधार क्या था?

​रिपोर्ट के अनुसार, बीएलओ द्वारा 589 मतदाताओं का आधार सत्यापन कराया गया था। कंप्यूटर पर फीडिंग के दौरान 123 नाम डुप्लीकेट मानकर विलोप किए गए, जिनमें 5 नाम दोहराए गए थे। इस प्रकार वास्तविक रूप से 118 नाम गलत तरीके से हटे, जिसके बाद कार्रवाई के नाम पर केवल फिरोज अहमद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर दी गई।

प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े होते बिंदु:

  • ​यदि फिरोज अहमद एक सफाईकर्मी हैं, तो उन्हें निर्वाचन जैसे संवेदनशील और गोपनीय कार्य में किस आदेश के तहत लगाया गया था?
  • ​क्या उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य करने के लिए किसी सक्षम अधिकारी ने अधिकृत किया था? यदि हाँ, तो उसका लिखित आदेश कहाँ है?
  • ​यदि जांच रिपोर्ट ने किसी भी व्यक्ति की स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं की थी, तो एफआईआर दर्ज करने का आधार क्या था?
  • ​यदि वे एडीओ पंचायत कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य कर रहे थे, तो किस अधिकारी के आदेश या अनुमति से यह कार्य कराया जा रहा था?

विवेचना और आरटीआई से खुलेगा राज

​इस प्रकरण में अब पुलिस विवेचना के साथ-साथ आरटीआई (सूचना का अधिकार) से मिलने वाले दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। इन्हीं अभिलेखों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मतदाता सूची से 118 नाम हटाने की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और प्रशासनिक स्तर पर किस-किस अधिकारी की क्या भूमिका रही है।

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